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बवासीर खूनी क्या है? (What is Bleeding Piles?)

बवासीर खूनी (Bleeding Piles / Hemorrhoids) वह स्थिति है जिसमें मलाशय की रक्त वाहिनियाँ फूल जाती हैं और मल त्याग के दौरान उनसे रक्तस्राव होता है। आयुर्वेद में इसे "रक्तार्श" कहते हैं। यह समस्या कब्ज, पित्त दोष की अधिकता और मलाशय में दबाव के कारण होती है। अनदेखा करने पर रक्ताल्पता (Anemia) और गंभीर कमजोरी हो सकती है।

Healthkawifi Ayurvedic Clinic, वाराणसी में बवासीर खूनी का जड़ से इलाज आयुर्वेदिक औषधियों और क्षार सूत्र द्वारा किया जाता है। बिना ऑपरेशन, बिना दर्द — स्थायी समाधान। Dr. Ranjeet Keshari के 30+ वर्षों के अनुभव से हजारों रोगी लाभान्वित हो चुके हैं।

🔥 पित्त दोष 💨 वात दोष 🩸 रक्त दूषण 🌿 रक्तार्श
आयुर्वेदिक उपचार — वीडियो देखें
Dr. Ranjeet Keshari द्वारा — बवासीर खूनी के आयुर्वेदिक उपचार की पूरी जानकारी
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विशेषज्ञ उपचार30+ वर्षों का अनुभव — Dr. Ranjeet Keshari
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वाराणसी क्लिनिकHealthkawifi Oldest Ayurvedic Clinic, Varanasi
🔍 कारण

बवासीर खूनी के मुख्य कारण

आयुर्वेद के अनुसार बवासीर खूनी के कई कारण हो सकते हैं। सही कारण जानना सही उपचार की पहली सीढ़ी है। पित्त दोष और वात दोष का असंतुलन मुख्य भूमिका निभाता है।

लंबे समय से कब्ज और मल त्याग में अत्यधिक जोर वात दोष के असंतुलन से मल कठोर हो जाता है और जोर लगाने पर मलाशय की नसें फूल जाती हैं।
कम फाइबर और अधिक तला-भुना भोजन फाइबर की कमी से मल सख्त होता है और तला-भुना खाना पित्त दोष को बढ़ाता है।
पर्याप्त पानी न पीना शरीर में जल की कमी से मल सूख जाता है, कब्ज और बवासीर का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भावस्था और प्रसव के दौरान दबाव गर्भावस्था में बढ़ते गर्भाशय का दबाव मलाशय की रक्त वाहिनियों पर पड़ता है।
मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता अधिक वजन और बैठे रहने की आदत से मलाशय पर दबाव बढ़ता है और पित्त असंतुलित होता है।
पित्त दोष की अधिकता पित्त दोष बढ़ने से रक्त वाहिनियों में सूजन और रक्तस्राव की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।
वंशानुगत प्रवृत्ति यदि परिवार में बवासीर का इतिहास है तो इसकी संभावना अधिक रहती है।
लंबे समय तक टॉयलेट में बैठे रहना लंबे समय तक बैठे रहने से मलाशय की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

इन सभी कारणों में पित्त दोष और वात दोष का असंतुलन मुख्य भूमिका निभाता है। Healthkawifi Clinic में Dr. Ranjeet Keshari पहले दोष की पहचान करते हैं, फिर जड़ से उपचार करते हैं — रक्तार्श का आयुर्वेदिक इलाज सिर्फ लक्षण नहीं दबाता, रोग की जड़ को ठीक करता है।

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मुख्य कारण
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अनुभव
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उपचार
⚠️ लक्षण

बवासीर खूनी के लक्षण क्या हैं?

इन लक्षणों में से कोई भी बार-बार महसूस हो रहा है तो तुरंत आयुर्वेदिक परामर्श लें। सही समय पर पहचान ही सही इलाज की शुरुआत है।

1
मल त्याग के दौरान या बाद में चमकीला लाल रक्त चमकीला लाल रक्त बवासीर खूनी का सबसे स्पष्ट संकेत है — पित्त दोष की अत्यधिक वृद्धि।
गंभीर
2
टॉयलेट पेपर या टॉयलेट सीट पर रक्त मल त्याग के बाद टिशू पेपर पर खून आना — रक्तार्श का प्रारंभिक लेकिन महत्वपूर्ण संकेत।
गंभीर
3
गुदाद्वार में दर्द और जलन पित्त दोष बढ़ने से गुदा क्षेत्र में तेज जलन और दर्द होता है — विशेषकर मल त्याग के समय।
मध्यम
4
मलाशय से बाहर निकलने वाले मस्से सूजे हुए मस्से (Hemorrhoidal tissue) मलाशय के बाहर आ जाते हैं — यह गंभीर स्थिति का संकेत।
गंभीर
5
बैठने में असुविधा मस्सों के कारण बैठने में बेचैनी और तकलीफ — दैनिक जीवन प्रभावित होता है।
मध्यम
6
थकान और कमजोरी (रक्तस्राव से Anemia) बार-बार खून जाने से शरीर में रक्त की कमी (Anemia) हो सकती है जिससे थकान और पीलापन आता है।
गंभीर
7
मल त्याग के बाद अधूरेपन का एहसास मल त्याग के बाद भी पेट साफ न होने का अहसास — वात दोष और कब्ज का संकेत।
मध्यम
8
गुदाद्वार में खुजली और सूजन मस्सों के कारण गुदा क्षेत्र में खुजली और सूजन — पित्त और कफ दोष का असंतुलन।
सामान्य
क्या आप इनमें से कोई लक्षण महसूस कर रहे हैं?

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🌿 आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद में बवासीर खूनी का कारण और उपचार सिद्धांत

आयुर्वेद केवल लक्षण नहीं दबाता — यह रोग की जड़ को पहचान कर शरीर को प्राकृतिक रूप से ठीक करता है।

आयुर्वेद में बवासीर खूनी को "रक्तार्श" कहा गया है। यह मुख्यतः पित्त दोष और रक्त धातु की विकृति से उत्पन्न होती है। पित्त के प्रकोप से मलाशय की रक्त वाहिनियाँ क्षतिग्रस्त होती हैं और रक्तस्राव होता है। वात दोष से कब्ज बनती है जो स्थिति को बिगाड़ती है।

उपचार में रक्त स्तंभक, पित्त शामक और अर्श-घ्न औषधियाँ जैसे नागकेसर, अशोक, कुटज, बोलबद्ध रस, अभयारिष्ट और लोध्र का उपयोग किया जाता है। क्षार सूत्र और अग्नि कर्म से मस्सों का उपचार किया जाता है। बस्ति चिकित्सा मलाशय को शुद्ध और पोषित करती है।

पित्त दोष Pitta Dosha — अग्नि तत्व

पित्त के प्रकोप से मलाशय की रक्त वाहिनियाँ क्षतिग्रस्त होती हैं और रक्तस्राव की प्रवृत्ति बढ़ती है।

वात दोष Vata Dosha — वायु तत्व

वात दोष से कब्ज उत्पन्न होती है जो मलाशय पर दबाव बढ़ाकर रक्तस्राव की स्थिति को बिगाड़ती है।

रक्त धातु विकृति Rakta Dhatu — रक्त तत्व

रक्त धातु में विकृति आने से रक्त वाहिनियाँ कमजोर पड़ जाती हैं और रक्तस्राव होने लगता है।

क्षार सूत्र चिकित्सा Kshar Sutra — मस्सों का उपचार

क्षार सूत्र द्वारा मस्सों को जड़ से हटाने की सुरक्षित आयुर्वेदिक प्रक्रिया — बिना ऑपरेशन।

🔄 आयुर्वेदिक रोग उत्पत्ति क्रम (Samprapti)

1
गलत आहार-विहार तला-भुना खाना, मसाले, देर रात खाना, शारीरिक निष्क्रियता — पित्त-वात असंतुलन की शुरुआत।
2
पित्त दोष वृद्धि और कब्ज पित्त बढ़ने से रक्त धातु दूषित होती है और वात बढ़ने से कब्ज उत्पन्न होती है।
3
मलाशय पर दबाव कब्ज के कारण मल त्याग में जोर लगाने से मलाशय की रक्त वाहिनियाँ फूलने लगती हैं।
4
रक्त वाहिनियों में सूजन पित्त दोष और दबाव से रक्त वाहिनियाँ क्षतिग्रस्त होकर मस्सों का रूप लेती हैं।
5
रक्तार्श (Bleeding Piles) प्रकटन मस्सों से रक्तस्राव होने लगता है — यही रक्तार्श की पूर्ण अवस्था है।
💊 उपचार

Healthkawifi Clinic में बवासीर खूनी का उपचार कैसे होता है?

हर मरीज़ अलग होता है — इसलिए यहाँ कोई एक नुस्खा सबको नहीं दिया जाता। प्रत्येक रोगी की प्रकृति परीक्षण के बाद व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है।

1
पहला चरण रोगी परीक्षण (Examination by Dr. Ranjeet Keshari)

Dr. Ranjeet Keshari द्वारा गुदा और रक्तस्राव की गंभीरता जांच, दोष परीक्षण, रक्त जांच। नाड़ी परीक्षा और लक्षणों के आधार पर उपचार की दिशा निर्धारित होती है।

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दूसरा चरण रक्त स्तंभन औषधि (Raktasthambhana Herbs)

नागकेसर, बोलबद्ध रस, कुटज घन वटी — तत्काल रक्तस्राव रोकने के लिए। ये औषधियां पित्त को शांत करती हैं और रक्त वाहिनियों को मजबूत बनाती हैं।

🌸 नागकेसर 🌿 बोलबद्ध रस 💊 कुटज घन वटी
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तीसरा चरण पित्त शामन — मस्सों की जड़ में पित्त शमन

अभयारिष्ट वटी, अश्विनी वटी, सुरण — मस्सों की जड़ में पित्त दोष को शांत करने के लिए। इससे सूजन कम होती है और दोबारा रक्तस्राव की संभावना घटती है।

💊 अभयारिष्ट वटी 🌿 अश्विनी वटी 🍠 सुरण
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चौथा चरण क्षार सूत्र/अग्नि कर्म: मस्सों को जड़ से हटाना

मस्सों को जड़ से हटाने हेतु सुरक्षित आयुर्वेदिक प्रक्रिया। क्षार सूत्र एक प्रभावशाली, न्यूनतम आक्रामक विधि है जो बिना बड़े ऑपरेशन के बवासीर को ठीक करती है।

🔗 क्षार सूत्र 🔥 अग्नि कर्म
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पाँचवाँ चरण आहार परामर्श: उच्च फाइबर भोजन योजना

उच्च फाइबर भोजन, पर्याप्त पानी, मसालेदार-तले पदार्थों से परहेज, नियमित व्यायाम। इससे कब्ज नहीं होती और दोबारा बवासीर का खतरा न्यूनतम रहता है।

🥗 उच्च फाइबर 💧 पर्याप्त पानी 🚫 मसाले परहेज
जड़ से उपचार सिर्फ रक्तस्राव नहीं, रोग की मूल वजह को ठीक किया जाता है।
100% प्राकृतिक शुद्ध जड़ी-बूटियाँ — कोई chemical side effects नहीं।
व्यक्तिगत उपचार हर मरीज़ की प्रकृति के अनुसार अलग उपचार योजना।
स्थायी परिणाम दोबारा न हो — इस लक्ष्य से उपचार किया जाता है।
Follow-Up सुविधा उपचार के दौरान निरंतर मार्गदर्शन मिलता है।
🏠 घरेलू नुस्खे

बवासीर खूनी के आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे

ये घरेलू नुस्खे सदियों से आयुर्वेद में बवासीर खूनी के लिए उपयोग होते आए हैं। सरल, सुरक्षित और तुरंत राहत देने वाले।

नुस्खा 01 छाछ और जीरा

रोज दोपहर छाछ में जीरा और सेंधा नमक मिलाकर पिएं — पित्त शामक। यह पाचन को सुधारता है, कब्ज दूर करता है और रक्तस्राव को नियंत्रित करता है।

💡 एक गिलास छाछ + आधा चम्मच जीरा + सेंधा नमक — रोज दोपहर के भोजन के बाद।
नुस्खा 02 अनार का रस

रोज अनार का रस पिएं — रक्त बनाता है और रक्तस्राव कम करता है। अनार में रक्त स्तंभक गुण होते हैं जो बवासीर खूनी में अत्यंत प्रभावशाली हैं।

💡 एक गिलास ताज़ा अनार का रस — रोज सुबह खाली पेट या भोजन से 30 मिनट पहले।
नुस्खा 03 त्रिफला चूर्ण

रात को त्रिफला चूर्ण गर्म पानी के साथ लें — कब्ज दूर करता है। त्रिफला पाचन तंत्र को साफ कर कब्ज की समस्या दूर करता है जो बवासीर का मुख्य कारण है।

💡 आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण — रात को सोने से पहले गर्म पानी के साथ लें।
नुस्खा 04 सिट्ज बाथ

दिन में 2 बार गर्म पानी में बैठें — गुदाद्वार की जलन और सूजन कम होती है। गर्म पानी में नीम की पत्तियाँ या फिटकरी मिलाने से अधिक लाभ होता है।

💡 गर्म पानी में 10-15 मिनट बैठें — दिन में 2 बार, सुबह और रात को।
नुस्खा 05 ठंडा दूध

रोज रात ठंडा दूध पिएं — पित्त को शांत करता है और रक्तस्राव कम होता है। दूध में मिश्री मिलाकर पीने से और अधिक लाभ मिलता है।

💡 एक गिलास ठंडा दूध + मिश्री — रात को सोने से पहले। गर्म मसालेदार खाने के बाद विशेष रूप से लाभदायक।
🌿 इन नुस्खों में उपयोग की गई प्रमुख जड़ी-बूटियाँ और सामग्री
🥛छाछ
🍎अनार
🌿त्रिफला
🧂सेंधा नमक
🌙जीरा
🧪फिटकरी
🥛ठंडा दूध
🍬मिश्री
घरेलू नुस्खों से राहत न मिले तो विशेषज्ञ से मिलें!

Healthkawifi Clinic, Varanasi — 30+ वर्षों का अनुभव
8960879832 | सोमवार–शनिवार: 9AM – 6PM

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❓ FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

बवासीर खूनी के आयुर्वेदिक इलाज से जुड़े सबसे सामान्य सवाल और उनके विशेषज्ञ जवाब।

✅ उत्तर

किसी भी मात्रा में मल के साथ रक्त आना सामान्य नहीं है। हल्की बवासीर खूनी में रक्त की कुछ बूंदें होती हैं, लेकिन यदि रक्तस्राव अधिक हो तो तुरंत चिकत्सक से मिलें।

परामर्श लें →
✅ उत्तर

हाँ, ग्रेड 1–2 की खूनी बवासीर आयुर्वेदिक औषधियों, क्षार कर्म और जीवनशैली बदलाव से बिना ऑपरेशन ठीक हो सकती है। Healthkawifi Clinic में यही पद्धति अपनाई जाती है।

अपॉइंटमेंट बुक करें →
✅ उत्तर

ठंडे पानी से सिट्ज बाथ करें, छाछ पिएं और नागकेसर चूर्ण शहद के साथ लें। तुरंत Dr. Ranjeet Keshari से परामर्श लें — 8960879832। खुद दवाई लेने से बचें।

✅ उत्तर

बवासीर में चमकीला लाल रक्त मल के बाहर होता है, कैंसर में गहरा काला खून मल के साथ मिला होता है। सही निदान के लिए डॉक्टर से जांच जरूरी है।

✅ उत्तर

हल्की बवासीर में 4–6 सप्ताह में रक्तस्राव बंद होता है। गंभीर मामलों में क्षार सूत्र और 8–12 सप्ताह के उपचार से पूर्ण लाभ होता है।

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सामान्य सवाल
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